बता दें कि पिछले साल नवंबर के बीच में गोर ने भारत में अमेरिकी राजदूत के तौर पर शपथ ली थी। अमेरिकी सीनेट ने पिछले साल अक्टूबर में उनकी नियुक्ति की पुष्टि की थी। गोर ने इस हफ्ते सोमवार को दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में अपना पद संभाला। इससे पहले, वह व्हाइट हाउस में कार्मिक निदेशक के तौर पर काम कर चुके हैं। पद संभालने के बाद अपने पहले बयान में, उन्होंने दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को बेहतर बनाने का इरादा जताया, और कहा कि अमेरिका के लिए भारत जितना महत्वपूर्ण कोई दूसरा देश नहीं है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों पक्ष एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दोस्ती सच्ची है और यह दोस्ती मजबूत भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों की नींव है। सर्जियो गोर ने साफ किया कि उन्होंने खुद ट्रंप के साथ दुनिया भर में काम किया है, और अपने अनुभव के आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि ट्रंप और मोदी के बीच व्यक्तिगत स्तर पर गहरा विश्वास और सम्मान है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत हमेशा साफ और सीधी रही है।राजदूत गोर ने माना कि किसी भी मजबूत साझेदारी में, खासकर व्यापार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर, कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ऐसे मतभेद रिश्ते को कमजोर नहीं करते, बल्कि परिपक्व बातचीत के ज़रिए समाधान की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता जटिल है, लेकिन दोनों देश इसे सफल बनाने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं।भारत को अमेरिका के लिए एक “महत्वपूर्ण साझेदार” बताते हुए, सर्जियो गोर ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अमेरिका के लिए भारत जैसा कोई दूसरा भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैले हुए हैं।राजदूत गोर ने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। उन्होंने माना कि यह प्रक्रिया आसान नहीं है, लेकिन दोनों पक्ष सकारात्मक हैं और आगे बढ़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में व्यापार वार्ता में और प्रगति की उम्मीद है।अमेरिकी राजदूत के बयान से यह साफ है कि ट्रंप-मोदी की व्यक्तिगत दोस्ती सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों की एक ठोस नींव है। व्यापार जैसे जटिल मुद्दों पर असहमति के बावजूद, दोनों देश सहयोग, बातचीत और साझेदारी के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह रिश्ता आने वाले सालों में ग्लोबल पॉलिटिक्स और इकोनॉमिक्स में एक अहम भूमिका निभा सकता है।
